सोमवार 18 मई 2026 - 15:30
इस्लामी क्रांति ने हौज़ा ए इल्मिया की ज़िम्मेदारी को वैश्विक बना दियाः हुज्जतुल इस्लाम अमीन रज़ा आबेदी नेज़ाद

हौज़ा / अल-मुस्तफ़ा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के सहायक अनुसंधान हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अमीन रज़ा आबेदी निजाद ने कहा कि हौज़ा ए इल्मिया की ज़िम्मेदारी केवल स्थानीय या क्षेत्रीय नहीं है, बल्कि स्वाभाविक रूप से वैश्विक और सभ्यता-निर्माण है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , जामेअतुल मुस्तफ़ा अल आलमिया के सहायक अनुसंधान हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अमीन रज़ा आबेदी नेजाद ने "विकसित और कारगर हौज़ा ए इल्मिया विषय पर आयोजित समारोह में बोलते हुए कहा कि हौज़ा ए इल्मिया की ज़िम्मेदारी केवल स्थानीय या क्षेत्रीय नहीं, बल्कि स्वाभाविक रूप से वैश्विक और सभ्यता-निर्माण है।

उन्होंने कहा कि रहबरे इंकिलाब की शहादत के बाद दुनिया भर में जो जागरूकता पैदा हुई है, वह एक वैश्विक बेअसत के समान है। आज दुनिया में अत्याचार और शक्ति की ताकत कमजोर हो रही है और राष्ट्र जाग रहा हैं।

उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि इस्लामी क्रांति के बाद इमाम खुमैनी (रह.) ने हौज़ा की ज़िम्मेदारी को पैगम्बरों के वैश्विक मिशन से जोड़ दिया। हौज़ा का उद्देश्य केवल पढ़ाना-पढ़ाना नहीं है, बल्कि "इक़ाम-ए-दीन और "इज़हार-ए-दीन है। इसलिए हौज़ा ए इल्मिया का संदेश अंतरराष्ट्रीय और सभ्यता-निर्माता है।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अमीन रज़ा आबेदी निजाद ने हौज़ा की चार बड़ी वैश्विक ज़िम्मेदारियाँ बताईं: धार्मिक और बौद्धिक ज्ञान का उत्पादन, वैश्विक मानकों की शिक्षा/प्रशिक्षण, प्रभावशाली वैश्विक प्रचार, और इस्लामी व्यवस्था एवं सभ्यता की व्यावहारिक स्थापना।

उन्होंने इमाम खुमैनी (रह.) के फरमान का हवाला देते हुए कहा कि फिक़ह मनुष्य के गोद (पालना) से लेकर कब्र तक मार्गदर्शन की प्रणाली है।

जामेअतुल मुस्तफ़ा अल-आलमिया के सहायक अनुसंधान ने कहा कि तबलीग़ केवल सूचना पहुँचाने का नाम नहीं है, बल्कि दिलों पर प्रभाव डालने की क्रिया है। इस्लामी गणराज्य यदि न्याय, इस्लामी अर्थव्यवस्था और धार्मिक व्यवस्था का सफल नमूना प्रस्तुत करे, तो यही इस्लाम का सबसे बड़ा प्रचार होगा।

उन्होंने आगे कहा कि उम्मत-ए-मुस्लिमा को इल्मी ख़ुदमुख्तारी हासिल करनी होगी और पश्चिमी वैज्ञानिक मानकों पर निर्भरता समाप्त करनी होगी।

अंत में उन्होंने कहा कि हौज़ात ए इल्मिया को अपनी वैश्विक ज़िम्मेदारी निभाने के लिए: ईमानी इरादा, सभ्यता-निर्माण (तमद्दुनी) आत्मविश्वास, और वैश्विक स्तर की फिकरी इस्तिकलाल की आवश्यकता है।

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